Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
असम्यग्दर्शनं तेन त्यज राम निराश्रयम् ।
साश्रयं सत्यमानन्दि सम्यग्दर्शनमाश्रय ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, आप असद्विषयिणी भ्रान्ति का त्याग कीजिये ओर
सत्यार्थविषयक तथा सत्य सम्यक् दर्शन का अवलम्बन कीजिये जो कि आनन्ददायक हे