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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 103, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

चित्रां क्रीडनकश्रेणीं यथा पङ्काद्गृहे शिशुः । करोत्येवं मनो राम विकल्पं कुरुते जगत् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे रामचन्द्रजी, जैसे बच्चा घर में मिट्टी से नाना प्रकार के खिलौनों को बनाता है, वैसे ही मन जगद्रूप विकल्पों की सृष्टि करता हे