Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 103, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
ततः सैव क्रिया चित्तसमाहितफलाफलम् ।
क्षणात्प्रयच्छति लता कालसिक्तेव तादृशम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर भोग्य पदार्थो को उपस्थित करनेवाली वह
क्रिया ही चित्त द्वारा कल्पित फलाफल यानी सुखदुःख को एक क्षण में वैसे ही देती है जैसे
समय पर सींची गई लता फल प्रकट करती है