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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 103, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

करोत्यृतुकरः कालो यथा रूपान्यथा तरोः । चित्तमेवं पदार्थानामेषामेवान्यतामिव ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे ऋतुओं का निर्माण करनेवाला काल वृक्ष की अन्यरूपता कर देता है वृक्ष को विलक्षण बना देता है, वैसे ही चित्त ही इन सब पदार्थो को विलक्षण बनाता है