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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 107, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 107, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 107 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

नृपालपुत्रकेनैकतनयेन तदा मया । नीता नीरन्ध्रदोषेण षष्टिः कल्पसमाः समाः ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा के लड़के उसमें भी इकलौते लड़के अतएव दोषों से अत्यन्त निविड मैंने तब कल्प के सदुश साठ वर्ष बिताये