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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 109, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 109 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । सभायामवसं तस्यामहं राम तदा किल । तेन प्रत्यक्षतो दृष्टं मयैतन्नान्यतः श्रुतम् ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

यह आख्यायिका न तो बालकाख्यायिका के समान कल्पित कथा है ओर न दूसरे के मुँह से सुनी है, बल्कि प्रत्यक्ष देखी हुई सच्ची घटना है, ऐसा कहते हैँ । वत्स श्रीरामचन्द्रजी, उस समय उस सभा में मैं उपस्थित था, इसलिए यह सब मैंने अपनी आँखों से देखा है, दूसरे के मुँह से नहीं सुना है