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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 110, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

लघु दीर्घं करोत्येव सत्येऽसत्तां प्रयच्छति । कटुतां नयति स्वादु रिपुं नयति मित्रताम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

मन छोटे पदार्थ को बड़ा बना देता है, सत्य पदार्थ मे असत्ता स्थापित कर देता हे । स्वादिष्ट वस्तु को कट्‌ बना देता है और शत्रु को मित्र बना डालता हे