Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 110, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
य एव प्रतिभासोऽस्य चेतसो वृत्तिवर्तिनः ।
ततस्तदेव प्रत्यक्षं तथात्रानुभवादिह ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जो
वृत्तिवर्ती चित्त का प्रतिभास है यानी चैतन्य द्वारा उज्ज्वलित मन की घट, पट आदि विषयाकार
वृत्ति है, वही प्रत्यक्षनामक प्रमाण है, क्योकि लोक में तथा शास्त्र में ऐसा ही अनुभव है