Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
भूतेभ्यो द्विजपूर्वेभ्यो दत्त्वा सर्वस्वदक्षिणाम् ।
विबुध्यत दिनस्यान्ते स्व एवोपवने नृपः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्राह्मण आदि प्राणियों को सर्वस्व
दक्षिणा देकर राजा अपने ही उपवन में दिन के अन्त में जाग उठा