Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 117, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 117, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 117 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तत्र सप्तप्रकारा त्वमज्ञानस्य भुवं श्रृणु ।
ततः सप्तप्रकारां त्वं श्रोष्यसि ज्ञानभूमिकाम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें से
पहले आप सात प्रकार की अज्ञानभूमिका को सुनिये । तदनन्तर आप सात प्रकार की
ज्ञानभूमिका को सुनेगें