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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 118, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 118, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 118 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

विचारणाशुभेच्छाभ्यामिन्द्रियार्थेष्वसक्तता । यात्र सा तनुता भावात्प्रोच्यते तनुमानसा ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

विचारणा और शुभेच्छा से साधन चतुष्टय सम्पत्तिपूर्वक किये गये श्रवण और मननसे युक्त निदिध्यासन से मन की शब्द आदि विषयों में असक्ततारूप जो तनुता (सविकल्प समाधिरूप सूक्ष्मता) है, वह तनुमानसा नामक भूमिका कही गई है । उक्त भूमिका में मन अत्यन्त सूक्ष्म हो जाता है, इसलिए वह तनुमानसा कही गई है