Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 122, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
घटे कपालतां याते घटाकाशो न नश्यति ।
यथा तथा शरीरेऽस्मिन्नष्टेऽपि न विनश्यति ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे घट के फूटकर टुकड़े होने पर घटाकाश का विनाश नहीं होता, वैसे
ही इस शरीर के नष्ट होने पर आत्मा का विनाश नहीं होता