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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 77

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 14, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 77

संस्कृत श्लोक

अविकल्पतदात्मत्वात्सत्तासत्तैकतैव च । अवयवावयविता शब्दार्थौ शशशृङ्गवत् ॥ ७७ ॥

हिन्दी अर्थ

सावयव और निरवयव पदार्थो की कैसे अभिन्न सत्ता होगी ? यों कह रहे और विद्वानों के अनुभव का अलाप कर रहे तार्किकों (नैयायिको) को धिक्कार देते है। चिन्मय में अवयव ओर अवयवी शब्दों का अर्थ खरगोश के सींग के समान असत्‌ है । जिन लोगों ने विद्वानों के अनुभव के अपलाप के लिए अवयव ओर अवयवी इन शब्दों के अर्थो की कल्पना कर रक्खी है, उन तार्किकं को धिक्कार हे