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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

रज्ज्वां सर्पभ्रमे नष्टे सत्यबोधवशात्सुते । सर्पो न नष्ट उन्नष्टो वेत्येवं कैव सा कथा ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

बेटी, यथार्थज्ञान होने से रस्सी में सर्प की भ्रान्ति के निवृत्त होने पर सर्पका विनाश नहीं हुआ और हुआ यह कथन क्या प्रयोजन रखता है यानी जब सर्प था ही नहीं तब उसके विनाश और अविनाश की कथा काक दन्त गणना के समान निष्फल है