Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
किरातसैन्यकन्यानां कामं कलकलारवैः ।
अङ्गैरनङ्गतां नीत्वा भैरवैरिव गर्जितम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
केकयदेशवासियों ने अपने शत्रुओं को वीरपान में
(=) रोदन करनेवाले बना दिया, क्योंकि अपने सगे-सम्बन्धियों का विनाश होने से वीरपान
के समय उनका रोना स्वाभाविक हुआ ओर कंक देशवासियों ने अपने शत्रुओं को चीलों के
झुण्ड से आक्रान्त आकाश में उद्ूलित मस्तकवाले बना दिया ॥ २ ९॥ विजयप्राप्ति पर कोलाहल
करनेवाले अंगदेशवासियों ने किरात सेनिकरूपी कन्याओं की विदेहता को (अंगरहितत्व ओर
कामप्राबल्य को) प्राप्तकर भैरवों की नाई अत्यन्त गर्जना की