Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
ननर्दुर्नन्दनोद्यानसुन्दर्यो मत्तयौवनाः ।
वनोपवनदेशेषु मेरोर्वीरवराश्रिताः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
उन्मत्त यौवनवाली नन्दनवन की सुन्दरियाँ सुमेरु पर्वत
के वन और उपवनों में धीर वीर पुरुषों से संगत होकर अत्यन्त प्रसन्न हुईं