Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verses 51–52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verses 51–52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 51,52
संस्कृत श्लोक
तावत्तारारवं रेजे सैन्यकाननमुत्तमम् ।
यावन्न परपक्षेण प्राप्तं कल्पानलार्चिषा ॥ ५१ ॥
छिन्नाः पिशाचसंयुक्ता भूतापहृतहेतयः ।
पातयित्वा ययुः कर्णान्दशार्णास्तर्णका इव ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
कण्दिश के योद्धाओं को मार कर निकल गये