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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 56

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 40, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

याता यास्यन्ति यान्त्येता दृष्टयो नष्टरूपिणीः । या ब्रह्मण्युपबृंहाढ्यास्ताः के गणयितुं क्षमाः ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार ये मिथ्या ब्रह्माण्ड की सृष्टियाँ अनेक बार बीत चुकी हैँ, बीतेगी ओर बीतती हैं, जो ब्रह्म में आविर्भूत हुई हैं, उन्हें गिनने की किस में सामर्थ्य हे २।