Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अथ वातायनाद्देव्यौ मन्त्री राजा विदूरथः ।
ददृशुः प्रोल्लसन्नादं महानिशि महापुरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त दोनों
देवियों ने यानी सरस्वती देवी तथा लीला ने, मन्त्री ओर राजा विदूरथ ने अपने महल के
झरोखे से घोर रात्रि में अपने नगर को देखा जिसमें बडे भारी कोलाहल हो रहे थे