Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 46, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
एवं संकथयन्तीषु तासु तस्मिन्गृहोदरे ।
विदूरथः किमकरोन्निर्गत्य कुपितो गृहात् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : मुनिवर, उस राजमहल के अन्दर जब वे तीन ललनाएँ इस प्रकार
की बातचीत कर रही थी, तब क्रोध के साथ घर से निकल कर राजा विदूरथ ने क्या
किया ?
सर्ग सन्दर्भ
पैंतालीसवाँ सर्ग समाप्त छियालीसवाँ सर्ग राजा विदूरथ का विराट् सेना के साथ युद्ध के लिए प्रयाण ओर रणभूमि में प्रवेश पूर्वक युद्धारम्भ का वर्णन ।