Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

अन्धकाराम्बरोन्मुक्ता विरेजुरमला दिशः । भूपतेः पुरतः कान्ता इव रम्यपयोधराः ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

अन्धकाररूपी वस्त्र से उन्मुक्त सुन्दर मेघो से युक्त निर्मल दिशाएँ वस्त्ररहित रमणीय स्तनमण्डल से संपन्न कान्ताओं की नाई, राजा के सन्मुख सुशोभित हुई