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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

ययुः प्रकटतामन्तरखिला वनराजयः । लोभकज्जलजालेन मुक्ता इव सतां धियः ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

उनके मध्य में सज्जनो के अन्तःकरण में लोभरूपी काजल-समूह से मुक्त बुद्धि के समान सम्पूर्ण वनपंक्तियाँ प्रकट हो गई