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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

ते गिरीणां तथा क्षिप्ताः कोटितुण्डावखण्डनैः । शिरांसि पातयामासुः फलानीवोल्बणानिलाः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

उन्होंने (वस्नो ने) अपने करोड़ों मुखो द्वारा कर्तन से (काटने से) पर्वतों के शिखरों को ऐसे गिरा दिया जैसे कि आँधी फलों को गिरा देती है