Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 51, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 51, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सिन्धुदेवो जयत्येकच्छत्रभूमण्डलाधिपः ।
इत्यनन्तरमारेभे भेर्यः प्रतिपुरं तदा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त वहाँ पर पृथ्वी के एकच्छत्र अधिपति राजा सिन्धु की जय हो, ऐसी
घोषणा करते हुए प्रत्येक नगर में लोग भेरियाँ बजाने लगे