Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 51, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 51, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
राजधानीं विवेशाथ सिन्धुरुद्धुरकन्धरः ।
प्रजाः स्रष्टुं युगस्यान्ते मनुर्जगदिवापरः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पुत्र के राज्याभिषेक के बाद
जैसे प्रलय के अन्त में जगत् की सृष्टि करने के लिये मनु भगवान जगत् में प्रवेश करते हैं, वैसे
ही राजा सिन्धु ने, जो कि विजयजनित गर्व से उन्नत मस्तक था, दूसरे मनु की नाई राजधानी
में प्रवेश किया