Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 52, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 52, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

तत्पदं परमं विद्धि नाशोत्पादविवर्जितम् । स्वयं कचितमाभातं शान्तमाद्यमनामयम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

आप उस परम पद को, जो नाश और उत्पत्तिरहित, स्वयंप्रकाश, शान्त, आदि ओर निर्विकार हे, जगत्‌-रूप से प्रतीत जानो