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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्प्रथमतः सर्गे या यथा यत्र संविदः । कचितास्तास्तथा तत्र स्थिता अद्यापि निश्चलाः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

उस पहली सृष्टि में जो संकल्पवृत्तियाँ जहाँ पर जैसे (नियम- अनियमरूपसे) विकास को प्राप्त हुई वे वहाँ पर वैसी ही आज भी ज्यो-की-त्यों निश्चल (बिना हेर-फेर के) स्थित है