Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्गादौ स्वयमेवान्तश्चिद्यथा कचितात्मनि ।
हिमाग्न्यादितयाद्यापि सा तथास्ते स्वसत्तया ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
सृष्टि के आरम्भ
में स्वयं ही आत्मचैतन्य जैसे अपनी सत्ता से (शीतलता, उष्णता आदिरूप से) अपने में हिम,
अग्नि आदि के आविर्भाव को प्राप्त हुआ वह वैसे ही आजतक ज्यों-का- त्यों अविचलरूप से
स्थित है