Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तस्मात्स्वसत्तासंत्यागः सतः कर्तुं न युज्यते ।
यदा चिदास्ते तेनेयं नियतिर्न विनश्यति ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि मायाशबल ब्रह्म अपनी अधिष्ठान सत्ता का त्याग करेगा, तो मायान्तर्गत नियमों की
असत्ता हो जायेगी, लेकिन यह अशक्य है, ऐसा दिखलाती हुई देवीजी उपसंहार करती है ।
इसलिए माया शबल ब्रह्म अपनी सत्ता का त्याग करे, यह संभव नहीं हे, जब चिति हे, तब
उसीसे (चित् की सत्ता से ही) इस नियति का अपलाप नहीं किया जा सकता