Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
बालमृत्युप्रदैर्बालो युवा यौवनमृत्युदैः ।
वृद्धमृत्युप्रदैर्वृद्धः कर्मभिर्मृतिमृच्छति ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
विहित का आचरण न करने के समान निषिद्ध का आचरण करना भी आयु के ह्वास का हेतु
है, ऐसा कहती हैं।
बाल्यावस्था मेँ मृत्यु देनेवाले कर्मो से देही बाल्यावस्था में ही मर जाता है, युवावस्था
में मृत्यु देनेवाले कर्मो से युवावस्था में मर जाता है ओर वृद्धावस्था में मृत्यु देनेवाले कर्मो
से वृद्ध होकर मरता हे