Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 56, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
भगवन्पिण्डदानादिवासनारहिताकृतिः ।
कीदृक्संपद्यते जीवः पिण्डो यस्मै न दीयते ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले जो यह कहा था कि जीवने बन्धु ओं के पिण्डप्रदान से उत्पन्न हुए अपने शरीर को
देखा, उसे सार्वत्रिक समञ्जते हुए श्रीरामचन्द्रजी शंका करते हैँ ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : गुरुवर, जिसे पिण्ड नहीं दिया जाता, उसमें पिण्डदानादि वासना
का हेतु नहीं है, अतएव पिण्डदानादि वासना से रहित आकृति वाला वह जीव कैसे सशरीर
होता है ?