Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 56, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ते तं ददृशतुर्बाले दिव्यदृष्टी नभोगतम् ।
जीवं प्राणमयी संविद्गन्धलेशमिवानिले ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्राणवृत्ति से
उपहित संवित् वायु में स्थित सूक्ष्म गन्ध का अनुभव करती हे, वैसे ही दिव्यदृष्टिवाली उन
दोनों देवियों ने आकाश में गये हुए उस जीव को देखा