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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 56, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

सा जीवसंविद्गगने वातेन मिलिता सती । खे दूरं गन्तुमारेभे वासनानुविधायिनी ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

वह जीवसंवित्‌ गगनमण्डल में अतिवाहिक प्राणवायु से मिलकर वासना के वशवर्ती होकर आकाश में दूर जाने लगी