Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 56, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
ततो मुहूर्तमात्रेण शान्ते मरणमूर्च्छने ।
अम्बरे बुबुधे संविद्गन्धलेखेन वायुना ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्दर मुहूर्तभर में मरणमूर्छा के
शान्त होने पर जैसे वासनामय शरीर से स्वप्न आविर्भाव होता है, वैसे ही आकाश में वासनामय
देह से जीवचेतन प्रबुद्ध हुआ