Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 60, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
यथा भावितमेतेषां पदार्थानां निजं वपुः ।
तदेव हि चिराभ्यासान्नियतेर्वशमायतम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इन पदार्थों के स्वरूप की
जैसी भावना की, वही (भावित स्वरूप ही) चिरकाल के अभ्यास से नियति के वश में आ गया
है। चिरकाल से अभ्यस्त भावना का अनुसरण करनेवाली पदार्थों की अर्थक्रियाकारिता नियति
है