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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 61, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

लेखौघानां यथा भेदसंनिवेशः शिलोदरे । तथानन्यज्जगदहं चेत्यन्तश्चिद्धने घनम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे स्फटिकशिला के भीतर, भेद न होने पर भी प्रतिबिम्बित वनपंक्तियों की स्थिति विरुद्ध नहीं है, वैसे ही चिद्घन परब्रह्म में उससे अभिन्न "जगत्‌" और “अहम्‌' भेदप्रतीति विरुद्ध नहीं है। भाव यह कि स्फटिकशिला में प्रतिबिम्बरूप वनपंक्तियाँ स्फटिकशिला से अतिरिक्त नहीं है, फिर भी भेद से उनका सन्निवेश उनमें प्रतीत होता है, जिसमें किसी प्रकार का विरोध नहीं है, वैसे ही ब्रह्म से अभिन्न ही यह जगत्‌ ब्रह्म में भेद से प्रतीत होता है