Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

शुद्ध आत्मा नित्यतृप्त इव शान्तः समस्थितः । अपश्यन्पश्यतीवेमं चित्ताख्यं स्वप्नविभ्रमम् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जगत्‌ का साक्षी तो नित्य शुद्ध ही है, ऐसा कहते हैं । विशुद्ध, क्षुधा, पिपासा आदि के अभाव से नित्यतृप्त-सा, शान्त तथा समस्थित आत्मा इस चित्तनामक स्वप्नभ्रमको न देखता हुआ भी देखता-सा है