Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
अलीकमिदमुत्पन्नमलीकं च विवर्धते ।
अलीकमेव स्वदते तथालीकं विलीयते ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
हम लोगों की अस्वतन्त्रता के प्रभाव से और नियति द्वारा निर्धारित शक्ति, काल आदि
की व्यवस्था के देखने से यह जगत् सत्य ही है, ऐसा भ्रम नहीं करना चाहिए, ऐसा कहते हैं।
यह जगत् मिथ्या ही उत्पन्न हुआ है और मिथ्या ही वृद्धि को प्राप्त होता है, भोगकाल में
यह मिथ्या ही रोचक प्रतीत होता है और मिथ्या ही विलीन होता है