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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 77

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 77

संस्कृत श्लोक

शुद्धं सर्वगतं ब्रह्मानन्तमद्वितीयं दुःखबोधवशाद शुद्धमिवासदिवानेकमिवासर्वगमिवावबुध्यते ॥ ७७ ॥

हिन्दी अर्थ

तीन सर्गो में पद्यों द्वारा जो अर्थ विस्तारपूर्वक कहा गया है, उसीको गद्यों द्वारा संक्षेप से दिखलाते हैं । शुद्ध सर्वव्यापक ब्रह्म अनन्त और अद्वितीय हे, भ्रान्तिवश अशुद्ध-सा असत्‌-सा, नाना- सा, असर्वव्यापक-सा ज्ञात होता है