Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 70, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
सममेव च कौशेये क्षौमे च वसने सृता ।
जडः क इव वा नाम गुणागुणमपेक्षते ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह मृदु ओर स्निग्ध कोशेय वस्त्र में तथा कठिन ओर रुक्ष क्षौम
वस्त्र में (वल्कल में) तुल्यवृत्ति से प्रवेश करती हे । कोन मूर्ख गुण ओर अवगुण का विचार
करेगा