Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अशक्तया निगिरितुं मेदोमांसं तथा हृदि ।
नूनं रुदितमर्थाढ्यवृद्धातुरधिया यथा ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
मेदा और मांस को निगलने में असमर्थ
हुई वह अपने हृदय में इस प्रकार रोई, जैसे कि धनाढ्य वृद्ध, रोगी आदि पुरुष भोजन की
शक्ति न होने के कारण रोते हैं