Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
पृष्टश्च कथयामास दृष्टं सर्वं मयेत्यसौ ।
सहदेवनिकायाय शक्रायास्थानवासिने ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्र के पूछने
पर वायु ने देववृन्द से परिवृत्त और सभामें बैठे हुए इन्द्र से कहा : जिस कार्य के लिए आपने
मुझे आदेश दिया था, वह सब मैंने देखा