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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

सूच्या वरमहं दातुं गच्छामि हिमवच्छिरः । ब्रह्मणेति प्रतिज्ञाते शक्रः स्वर्गमुपाययौ ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

मैं सूची को वर देने के लिए हिमालय के शिखर में जाता हूँ, यों ब्रह्माजी के आश्वासन देनेपर इन्द्र स्वर्ग को लौट आये