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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verses 8–9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 74, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 8,9

संस्कृत श्लोक

महातपस्विनी सूची किमर्थं तप्यते तपः । नेति प्रष्टुं शशाकासौ तत्तेजोराशिनिर्जितः ॥ ८ ॥ भगवत्या महासूच्या अहो चित्रं महातपः । इत्येव केवलं ध्यायन्मारुतो गगनं ययौ ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

महातपस्विनी सूची किसलिए तपश्चर्या करती है, यह पूछने का उसको साहस नहीं हुआ, क्योंकि वह उसकी तेजोराशि से अभिभूत हो गया था, भगवती महासूची का महातप अत्यन्त आश्चर्यकारी है, केवल यही सोचता हुआ वायु आकाश में चला गया