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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 75, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 75, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

सूची कर्मेन्द्रियाभावाज्जीवमात्रकलावती । न किंचिद्व्याजहारास्मै चिन्तयामास केवलम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

सूची केवल जीवकलामात्र से युक्त थी, उसमें कर्मेन्द्रियाँ कोई थी नहीं, इसलिए उसने ब्रह्माजी से कुछ भी नहीं कहा, केवल अपने मन में विचार करती रही