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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 76, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अथ सा मासषट्केन ध्यानाद्बोधमुपागता । महाजलदनादेन प्रावृषीव शिखण्डिनी ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर छः महीने में जैसे वर्षाकाल में बड़े भारी मेघ के निर्घोष से मयूरी बोध को (कामोद्बोधको) प्राप्त होती है, वैसे ही ध्यान से बोध को प्राप्त हुई यानी समाधि से व्युत्थित हुई