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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 76, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

प्रबुद्धा सा बहिर्वृत्तिर्बभूव क्षुत्परायणा । यावद्देहं स्वभावोऽस्य देहस्य न निवर्तते ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

समाधि से जागी हुई वह बहिर्वृत्ति होकर क्षुधा से पीड़ित रही, जब तक देह रहती है, तब तक देह के स्वभाव क्षुधा, तृषा आदि की निवृत्ति नहीं होती