Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 77, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 77, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तदेतौ संपरीक्षेऽहं यदि तादृग्गुणान्वितौ ।
तद्भक्षं न करोम्येतौ न हिंस्या गुणिनः क्वचित् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए मैं इन दोनों की परीक्षा करती हूँ, यदि ये उस प्रकार के गुणों से युक्त
होगे, तो मैं उनको नहीं खाऊँगी, क्योकि मैं गुणियों की कभी हिंसा नहीं करती