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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 77, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 77, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अकृत्रिमं सुखं कीर्तिमायुश्चैवाभिवाञ्छता । सर्वाभिमतदानेन पूजनीया गुणान्विताः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

जो पुरुष स्वाभाविक (अक्षय) सुख, कीर्ति और आयु को चाहता हो, उसे चाहिए कि वह सम्पूर्ण अभीष्ट पदार्थों के दान से गुणी पुरुषों की पूजा करे