Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 78, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
लग्नामङ्गारकाष्ठेन समानां च महातनुम् ।
द्रुमाभास्पन्दसशिरलसद्भुजलतातनुम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
वह जले हुए काठ से चिह्नित और जले हुए काठ
के समान थी और उसका विशाल शरीर था, वृक्षों के तुल्य, स्पन्दरहित था, नसों से व्याप्त
सुन्दर भुजलताओंसे उसका आकार ओर भी अधिक बढ़ गया था